Monday, 18 May 2015

अगर तुम हो तो

यदि तुम ऐसा सोचती हो
कि मैं कवि हूँ
तो फिर तुम मेरी कविता हो,
ये जो कविता की इन पंक्तियों को लिख रहा हूँ
इनकी वजह भी तुम ही हो,
तुम तो मेरे ख्यालों में रहती हो
शायद यही वजह है कि
कलम तो खुद-ब-खुद चल पड़ती है,
क्योंकि इन ख्यालों की वजह भी तुम ही हो,
इसका मतलब
तुम नहीं, तो ये ख्याल नहीं
ख्याल नहीं, तो ये पंक्तियाँ नहीं
और ये पंक्तियाँ नहीं
तो फिर कविता नहीं
कविता नहीं, तो कवि नहीं
यानी तुम नहीं
तो मैं नहीं...
                                                     
                                  *राकेश वर्मा*

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