Saturday, 25 July 2015

बिना माँगे ही मिल गया...

मैंने तुम्हारे लिए कोई 
दुआ नहीं माँगी
वो तो मेरे दोस्त ही मेरे लिए 
दुआ कर गये

मैं उदास जरुर हुआ था 
पर किसी से खुशी नहीं माँगी
वो तो मेरे दोस्त ही मेरे लिए 
थोड़ी सी हँसी दे गए

मैंने परिस्थितिओं को झेलने के लिए
किसी की मदद नहीं माँगी
वो तो मेरे दोस्त ही मुझे 
थोड़ी सी हिम्मत दे गए

मैंने तो एक पल के लिए 
तुम्हें पाने की आस ही छोड़ दी
वो तो मेरे दोस्त ही मुझे
थोड़ी सी उम्मीद दे गए

*राकेश वर्मा*

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