Friday, 24 July 2015

एक मायूसी सी छा गई...

कितना खुश था मैं उस दिन
जब मुझे लगा कि 
शायद उसका जवाब "हाँ" ही होगा
उस दिन, 
वो खुशी मेरी आवाज में थी
वो खुशी मेरी बातों में थी
वो खुशी मेरे चेहरे पर थी
वो खुशी सभी ने देखी
पर उस खुशी की वजह
कोई भी न जान पाया
न ही मैंने किसी को जानने दी
क्योंकि मेरा अनुमान 
गलत भी हो सकता था

और वही हुआ
मेरी आशा निराशा में बदल गई
वो खुशी, अगले ही पल
अचानक से गायब हो गई
मैं मायूस हो गया, उदास हो गया
पर ये मायूसी किसी न देखी
क्योंकि ये मायूसी
सिर्फ और सिर्फ 
मेरे दिल के अंदर थी
न ही ये मेरे आवाज में थी,
न ही मेरे बातों में थी,
न ही मेरे चेहरे पर थी
क्योंकि इस मायूसी को
मैंने दिल से बाहर आने ही न दी

बावजूद इन सबके
एक चीज, जो अब भी 
मेरे दिल में है
वो है, उसकी आवाज
उसकी बातें, उसका चेहरा
उसकी यादें
और मेरा दिल 
जो अब भी उम्मीद लिए हुए है
कि शायद कोई अजूबा हो जाए
और वो मान जाए

*राकेश वर्मा*

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