Friday, 24 July 2015

क्या तुम इजाजत दोगी?

मैं सोचता हूँ
फिर से एक बार अतीत में जाऊँ
फिर से वही सारे सवाल दोहराऊँ
तो क्या तुम इजाजत दोगी

अगर नहीं तो क्यों?
अगर हाँ तो क्यों?
चूँकि मेरे सवाल तो वही है
तो, क्या अब भी तुम्हारे जवाब वही होंगे
क्या बिलकुल पहले जैसे ही होंगे?

कुछ तो परिवर्तन आया होगा
कुछ तो तुम्हारे मन को भाया होगा,
तुम्हारा दिल भी इन्सान का ही होगा
पत्थर का थोड़ी किसी ने बनाया होगा

तो क्या तुम इजाजत दोगी
कि फिर से वही सारे सवाल दोहराऊँ
या फिर मैं थोड़ा और इंतजार करूँ
कि तुम एक बार फिर से फैसला ले सको
और बिना मेरे सवाल किये
तुम खुद ही जवाब दे सको

तो क्या तुम इजाजत दोगी 
कि मैं थोड़ा और इंतजार करूँ
और तुम्हें प्यार करूँ

*राकेश वर्मा*

1 comment:

  1. Very hurt touching ❤️ my dr. bro...keep writing...

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