Friday, 24 July 2015

उम्मीद न थी...

तुम ना मिली तो क्या हुआ
मैं पहले भी खुश था
और अब भी हूँ

क्योंकि तुमसे तो मुझे
वो खुशियाँ मिली 
जिसकी मुझे उम्मीद न थी

क्योंकि तुमसे तो मुझे 
वो अनुभव मिला
जिसकी मुझे उम्मीद न थी

क्योंकि तुमसे तो मुझे
कुछ सीखने को मिला
जिसकी मुझे उम्मीद न थी

क्योंकि तुमने तो मुझे
हर परिस्थितियों का सामना करना सीखाया
जिसकी मुझे उम्मीद न थी

क्योंकि तुम तो 
मेरी प्रेरणा बन गई
जिसकी मुझे उम्मीद न थी

तुमने तो मुझे वो आशा दी
ताकि मेरे साथ कुछ बेहतर हो
जिस आशा की मुझे उम्मीद न थी

मुझे तो खुदा ने ऐसा दोस्त दिया
जिसकी बिलकुल भी उम्मीद न थी

इसलिए खुदा से बस यही एक दुआ है
कि ये दोस्ती न टूटे
तुम्हारा साथ न छूटे
ये दोस्ती सलामत रहे

*राकेश वर्मा*

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