मेरी कविता,
शायद मुझे प्यार नहीं करती
पर वो कविता,
मेरी कविताओं से बहुत खुश होती है
पर मुझे अब बहुत चिंता होती है
मेरी कविताएँ,
जो आज हँसा सकती है
तो कल रुला भी सकती है
पर क्या करूँ!
मेरे कलम जो खुद ही चल जाती है
रोकना चाहूँ तो भी रुक नहीं पाती है
और मेरी कविता के लिए
कुछ न कुछ लिख जाती है
आखिर इसे रोकूँ, तो कैसे?
कहीं ऐसा तो नहीं
मेरी कलम मेरी कविता से
मुझसे भी ज्यादा प्यार करती है!
*राकेश वर्मा*
शायद मुझे प्यार नहीं करती
पर वो कविता,
मेरी कविताओं से बहुत खुश होती है
पर मुझे अब बहुत चिंता होती है
मेरी कविताएँ,
जो आज हँसा सकती है
तो कल रुला भी सकती है
पर क्या करूँ!
मेरे कलम जो खुद ही चल जाती है
रोकना चाहूँ तो भी रुक नहीं पाती है
और मेरी कविता के लिए
कुछ न कुछ लिख जाती है
आखिर इसे रोकूँ, तो कैसे?
कहीं ऐसा तो नहीं
मेरी कलम मेरी कविता से
मुझसे भी ज्यादा प्यार करती है!
*राकेश वर्मा*
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