हमने खुद को तुम पर छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर
हमारी मंजिल तय नहीं थी
तो हमने तुम्हें अपनी मंजिल बनाई
फिर हमने रुख तुम्हारी तरफ मोड़ लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
दोस्ती से एक पल के लिए आगे निकले
लेकिन तुम्हारे कहने पर
फिर से दोस्ती का नाता जोड़ लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुम्हारे लिए कुछ सपने संजोए थे
जब हकीकत में बदलना असम्भव लगा
तो फिर हमने खुद उन्हें तोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
तुम्हें समझाने की पूरी कोशिश की हमने
पर तुम शायद मेरी बात समझ न पायी
तो फिर हमने तुम्हें समझाना छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुमसे कुछ सवाल किये
पर तुमने खुद को उन सवालों में उलझा दिया
तो हमने खुद ही अपना सवाल वापस ले लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुम्हारे लिए अपने दिल में जगह बनाई
वो जगह तुम्हारे बगैर अब भी खाली ही है
तुम्हारी आस में हमने उसे खाली ही छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
अब तो ये कविताएँ ही
जीने का एकमात्र सहारा हैं
तो खुद को इन कविताओं के सहारे छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
पर तुम्हारी यादों ने हमारा साथ न छोड़ा
तो हमने तुम्हारी किस्मत को
अपनी किस्मत से जोड़ लिया
और किस्मत को किस्मत पर ही छोड़ दिया
*राकेश वर्मा*
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर
हमारी मंजिल तय नहीं थी
तो हमने तुम्हें अपनी मंजिल बनाई
फिर हमने रुख तुम्हारी तरफ मोड़ लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
दोस्ती से एक पल के लिए आगे निकले
लेकिन तुम्हारे कहने पर
फिर से दोस्ती का नाता जोड़ लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुम्हारे लिए कुछ सपने संजोए थे
जब हकीकत में बदलना असम्भव लगा
तो फिर हमने खुद उन्हें तोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
तुम्हें समझाने की पूरी कोशिश की हमने
पर तुम शायद मेरी बात समझ न पायी
तो फिर हमने तुम्हें समझाना छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुमसे कुछ सवाल किये
पर तुमने खुद को उन सवालों में उलझा दिया
तो हमने खुद ही अपना सवाल वापस ले लिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
हमने तुम्हारे लिए अपने दिल में जगह बनाई
वो जगह तुम्हारे बगैर अब भी खाली ही है
तुम्हारी आस में हमने उसे खाली ही छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
अब तो ये कविताएँ ही
जीने का एकमात्र सहारा हैं
तो खुद को इन कविताओं के सहारे छोड़ दिया
और तुमको तुम्हारी किस्मत पर छोड़ दिया
पर तुम्हारी यादों ने हमारा साथ न छोड़ा
तो हमने तुम्हारी किस्मत को
अपनी किस्मत से जोड़ लिया
और किस्मत को किस्मत पर ही छोड़ दिया
*राकेश वर्मा*
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